भारतीय जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष श्री अमित शाह द्वारा जारी शोक-संदेश

भारत रत्न, सरस्वती पुत्र एवं देश की राजनीति के युगवाहक पूर्व प्रधानमंत्री कवि हृदय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के निधन का दुःखद समाचार सुनकर हृदय शोक-संतप्त है। लोकतंत्र के सजग प्रहरी और देश के पुनर्निर्माण में अमूल्य योगदान अदा करने वाले श्री वाजपेयी जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र-सेवा और जनसेवा को समर्पित रहा। वे सच्चे अर्थों में नवीन भारत के सारथी और सूत्रधार थे। वे एक ऐसे युग मनीषी थे, जिनके हाथों में काल के कपाल पर लिखने, मिटाने का अमरत्व था।

ओजस्वी वक्ता, विराट व्यक्तित्व और बहुआयामी प्रतिभा के धनी श्री वाजपेयी जी की जीवन यात्रा आजाद भारत के अभ्युदय के साथ शुरू होती है और विश्व-पटल पर भारत को विश्वगुरु के पद पर पुनः प्रतिष्ठित करने की आकांक्षा के साथ कई पड़ावों को जीते हुए आगे बढ़ती है। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे। वे 1968 से 1973 तक भारतीय जन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अटल बिहारी वाजपेयी में भारत का भविष्य देखा था। श्री वाजपेयी जी 10 बार लोक सभा के सांसद रहे। वहीं वे दो बार 1962 और 1986 में राज्यसभा के सांसद भी रहे। वाजपेयी जी देश के एक मात्र सांसद थे, जिन्होंने देश की  छह अलग- अलग सीटों से चुनाव जीता था। सन् 1957 से 1977 तक वे लगातार बीस वर्षों तक जन संघ के संसदीय दल के नेता रहे। आपातकाल के बाद देश की जनता द्वारा चुने गए मोरार जी देसाई जी की सरकार में वे विदेश मंत्री बने और विश्व में भारत की एक अलग छवि का निर्माण किया। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ में पहली बार हिंदी में ओजस्वी उद्बोधन देकर श्री वाजपेयी ने विश्व में मातृभाषा को पहचान दिलाई और भारत की एक अलग छाप छोड़ी। आपातकाल के दौरान उन्हें भी लोकतंत्र की हत्यारी सरकार की प्रताड़ना झेलनी पड़ी, उन्हें जेल में डाल दिया गया लेकिन उन्होंने जेल से ही कलम के सहारे ‘अनुशासन के नाम पर अनुशासन का खून’ लिख कर राष्ट्र को एकजुट रखने की कवायद जारी रखी।

सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए विचारधारा की राजनीति करने वाले श्री वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद पहले अध्यक्ष बने। उन्होंने तीन बार 1996, 1998-99 और 1999-2004 में प्रधानमंत्री के रूप में देश का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर देश को नयी ऊँचाइयों पर प्रतिष्ठित करने वाले श्री वाजपेयी जी के कार्यकाल में देश ने प्रगति के अनेक आयाम छुए।

अजातशत्रु श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के नारे को आगे बढ़ाते हुएजय जवान, जय किसान, जय विज्ञानका नारा दिया। देश की सामरिक सुरक्षा पर उन्हें समझौता बिलकुल भी गंवारा नहीं था। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने 1998 में पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण किये। इस परीक्षण के बाद कई अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद श्री वाजपेयी की दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति ने इन परिस्थितियों में भी उन्हें अटल स्तंभ के रूप में अडिग रखा। कारगिल युद्ध की भयावहता का उन्होंने डट कर मुकाबला किया और पाकिस्तान को राजनीतिक, कूटनीतिक, रणनीतिक और सामरिक, सभी स्तरों पर धूल चटाई।

श्री वाजपेयी जी के प्रधानमंत्रित्व काल में देश में विकास के स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हुई। वे देश के चारों कोनों को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी अविस्मरणीय योजना के शिल्पी थे। नदियों के एकीकरण जैसे कालजयी स्वप्न के द्रष्टा थे। मानव के रूप में महामानव थे। असंभव की किताबों पर जय का चक्रवर्ती निनाद करने वाले मानवता के स्वयंसेवक थे। सर्व शिक्षा अभियान, संरचनात्मक ढाँचे के सुधार की योजना, सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल का निर्माण और विद्युतीकरण में गति लाने के लिये केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि योजनाओं की शुरुआत कर देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने में उनकी भूमिका काफी अनुकरणीय रही। वाजपेयी सरकार की विदेश नीति ने दुनिया में भारत को एक नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रतिष्ठित रहा।

अपनी ओजस्वी भाषण शैली, मनमोहक मुस्कान, वाणी के ओज, लेखन व विचारधारा के प्रति निष्ठा तथा ठोस फैसले लेने के लिए विख्यात श्री वाजपेयी जी को कई पुरस्कारों से नवाजा गया। 1992 में उन्हें पद्म विभूषण, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में ही श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार, भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार और 2015 में उन्हें बांग्लादेश के सर्वोच्च अवार्ड ‘फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड’ से उन्हें सम्मानित किया गया। देश के विकास में अमूल्य योगदान देने एवं अंतर्राष्ट्रीय फलक पर देश को सम्मान दिलाने के लिए श्री वाजपेयी को 2015 में देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया गया। वे सभी दलों के कार्यकर्ताओं के लिए ऊर्जा के अक्षय प्रेरणास्रोत रहे। वे ऐसे वक्ता थे जिनके पास इस देश के सवा सौ करोड़ श्रोताओं में से सबके लिए कुछ न कुछ मौलिक था। इसीलिए गए साठ वर्षों से देश उनकी ओर खींचता चला गया।

एक कवि के रूप में भी श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘क्रांति और शांति’ दोनों ही राग को धार दी। उनकी कवितायें उन्हीं के शब्दों में जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। उनकी कविता हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय-संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है। ‘हार नहीं मानूंगा’, ‘गीत नया गाता हूँ’, ‘ठन गई, मौत से ठन गई’ जैसी कविताओं से उनका परिचय परिभाषित होता है कि उनकी सोच कितनी व्यापक थी। ‘मेरी इक्यावन कवितायें’ उनके प्रखर लेखन का अद्भुत परिचय है।  कभी कुछ मांगा भी तो बस इतना-

मेरे प्रभु!

मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना

गैरों को गले न लगा सकूं

इतनी रुखाई कभी मत देना।

 

देश के भविष्य को लेकर उनकी सोच स्पष्ट थी। उन्होंने कहा था, भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो। वे इसी आदर्श के लिए जिए। इसी की खातिर मरे। प्रधानमंत्री रहते उन्होंनेभयऔरभूखमुक्तभारत का सपना देखा था। जीवन मे न कुछ जोड़ा, न घटाया। सिर्फ दिया। वो भी निस्पृह हाथों से। भारत क्या है, अगर इसे एक पंक्ति में समझना हो तो अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम ही काफी है। श्री अटल बिहारी वाजपेयी इस देश की राष्ट्रीयता के प्राणतत्व थे। श्री वाजपेयी जी सच्चे मायनों में जनता के अंतर्मन की आवाज थे। राष्ट्र हमेशा उनके लिए सर्वप्रथम रहा। ये उनकी ही सोच थी जो संकीर्णताओं की दहलीज पारकर चमकती थी और सीधा विश्व चेतना को संबोधित करती थी कि मन हार कर मैदान नहीं जीते जाते। न मैदान जीतने से मन जीते जाते हैं।

उनका निधन न केवल भारतीय जनता पार्टी और विचार परिवार के करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए, बल्कि देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। आज राष्ट्र ने अपना सच्चा पुत्र खो दिया। व्यक्तिगत मेरे लिए यह ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। मन, कर्म और वचन से राष्ट्रवाद का व्रत लेने वाले वे अकेले राजनेता थे।

असीम दुःख की इस घड़ी में मैं व्यक्तिगत रूप से और भारतीय जनता पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं की ओर से ईश्वर से श्री वाजपेयी जी के परिवार एवं उन्हें चाहने वाले देश के सभी नागरिकों को इस असह्नीय कष्ट को सहन करने की शक्ति, साहस और धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

उनकी स्मृतियों को नमन। अटल जी को कोटि-कोटि नमन।

संकट की इस घड़ी में पार्टी के सभी कार्यक्रम स्थगित किये जाते हैं। प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक को भी अगली सूचना तक स्थगित किया जाता है। साथ ही, श्री वाजपेयी जी के सम्मान के प्रति भारतीय जनता पार्टी के सभी कार्यालयों के झंडे झुके रहेंगे।

ब्लॉग: भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को विनम्र श्रद्धांजलि

 

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