लखनऊ में विश्व के मुख्य न्यायाधीशों व न्यायाधीशों के 18वे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी के सम्बोधन के मुख्य अंश:

लखनऊ, 10 नवम्बर 2017: केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहाँ कहा कि, भारतीय न्यायपालिका विश्व की सबसे मजबूत, स्वतंत्र एवं पारदर्शी न्याय प्रणालियों में से एक है। लखनऊ में विश्व के मुख्य न्यायाधीशों व न्यायाधीशों के 18वे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए श्री नकवी ने कहा कि भारत में न्यायपालिका बिना किसी हस्तक्षेप, दबाव और भेदभाव के अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी से करती है।

इस सम्मेलन में लगभग 60 देशों के लगभग 200 मुख्य न्यायाधीश व न्यायाधीशों ने भाग लिया। भारत के अलावा अमेरिका, अफ़ग़ानिस्तान, अर्जेंटीना, ब्राज़ील, क्रोएशिया, मिस्र, ईरान, नेपाल, म्यांमार, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, जिम्बाब्वे आदि देशों के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश एवं कानूनी क्षेत्र के अन्य दिग्गज इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए।

श्री नकवी ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका में जनता का विश्वास दूसरी संवैधानिक संस्थाओं से कहीं ज्यादा बना हुआ है। क्योंकि भारतीय न्यायप्रणाली की नजर में देश का हर नागरिक एक समान है चाहे वह किसी भी धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र, जाति या वर्ग का हो, अमीर हो या गरीब हो। श्री नकवी ने कहा कि यह भारतीय न्यायपालिका की खूबी और मजबूती ही है कि समय-समय पर न्यायप्रणाली में बदलाव और सुधार की आवाज कहीं दूसरी जगह से नहीं बल्कि न्यायपालिका के भीतर से ही उठती है। इन सब बातों के चलते भारत की न्यायपालिका पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है। श्री नकवी ने कहा कि देश के कई बड़े भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने और उन पर कड़ी कार्रवाई करने के सम्बन्ध में देश की न्यायपालिका और विशेषकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका निभाई है। इसके अलावा देश की न्यायपालिका ने समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर भी अहम भूमिका निभाई है।

श्री नकवी ने कहा कि विभिन्न अदालतों में कई वर्षों से लंबित मामलें चिंता का विषय हैं लेकिन केंद्र सरकार एवं न्यायपालिका इस मुद्दे पर तेजी से काम कर रहे हैं ताकि आम जनता को न्याय जल्दी और सरलता से मिल सके। केंद्र सरकार लंबित मामलों के निपटारे एवं अन्य सुधारों के सम्बन्ध में न्यायपालिका को हर संभव सहयोग करने को तैयार है। इस सम्बन्ध में जल्द बड़े न्यायिक सुधार की जरुरत है। न्यायिक सुधार की दिशा में हमारी सरकार ने कई कदम उठाये हैं। कई और बड़े कदम की जरुरत है। श्री नकवी ने कहा कि केंद्र की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अभी तक लगभग 1200 गैर-जरुरी कानूनों को खत्म किया है और लगभग अन्य 1024 गैर-जरुरी कानूनों को खत्म करने के लिए चिन्हित किया है जो जल्द खत्म होंगे। यह जरुरी है कि नए कानूनों को बनाने के साथ पुराने-अप्रासंगिक एवं गैर-जरुरी कानूनों को खत्म किया जाये।

श्री नकवी ने कहा कि न्याय व्यवस्था ने ईमानदारी से लोगों में विश्वास कायम किया है। इस विश्वास को और मजबूत बनाना है। श्री नकवी ने कहा कि आज देश की अदालतें तेजी से डिजिटल हो रही हैं। कागज रहित प्रणाली कई बातों को आसान बनाएगी। श्री नकवी ने कहा कि इस वर्ष के मुख्य न्यायाधीशों व न्यायाधीशों के सम्मेलन का जोर विश्व भर के बच्चों के सुरक्षित वर्तमान और बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करना है। श्री नकवी ने कहा कि भारत में बाल अधिकारों के संरक्षण, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं चुनौतियों से सम्बंधित मजबूत कानून हैं। श्री नकवी ने कहा कि आज आतंकवाद-कट्टरवाद पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है और इस चुनौती से निपटने में भी न्यायपालिकाएँ बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।