नई दिल्ली स्थित सिविक सेण्टर में सिंघल फाउडेशन उदयपुर द्वारा भारतात्मा पुरस्कार समारोह गणमान्य विद्वानों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। भारतात्मा अशोक जी सिंघल जी की स्मृति में वैदिक पुरस्कार-2017 के वितरण समारोह में अपने उद्बोधन में उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि वेदों में सम्पूर्ण भारत की आत्मा निवास करती है। परमश्रद्वेय श्री अशोक जी सिंघल का पूरा जीवन सनातन घर्म के लिये समर्पित रहा। देश के विभिन्न मत और सम्प्रदाय से जुडे हुये पूज्य संतो को एक मंच पर लाकर राम जन्म भूमि आन्दोलन को जिस प्रकार का एक नेतृत्व उन्होंने दिया था, वह अविस्मरणीय है और आजादी के बाद का सबसे बडी साॅस्कृति आन्दोलन था। उन्होंने कहा ट्रस्ट द्वारा वैदिक पुरस्कारों की घोषणा आने वाले समय में अवश्य ही देश को नयी दिशा और आयाम प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा श्री अशोक जी के नाम पर काशी में एक वैदिक शोध संस्थान की स्थापना के लिये धनराशि उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक पहचान भारत के वैदिक साहित्य में छुपी हुयी है जाने अनजाने में जिसको हम लोगों ने विस्मृत सा कर दिया है। देश के अंदर जगह-जगह वेद विद्यालयों की स्थापना भारत की सनातन संस्कृति की मजबूती के लिये किस स्तर पर क्या योगदान हो सकता है, यह जीवन पर्यंत श्रृद्वेय अशोक जी करते रहे। वेदों के प्रति भारत तथा इस वैदिक परम्परा के लिये श्री अशोक जी का योगदान भुलाया नहीं जा सकता है। मुझे अत्यंत ही सुखद की अनुभूति हुयी कि वेदों के लिये समर्पित विशेष ट्रस्ट द्वारा किसी विशिष्ठ संस्था, आचार्य एवं शोधार्थी को पुरस्कृत किया जाने वाला है तथा पुरस्कार की धनराशि भी काफी अच्छी है। यह अत्यंत ही प्रशंसनीय अभिनंदनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि मैं इसके लिये श्रद्वेय अशोक जी की इस परम्परा को सनातन हिंदू धर्म और राष्ट्र की परम्परा को अक्षुण्य बनाये रखने के लिये जो कार्य इस ट्रस्ट के द्वारा प्रारम्भ किया है, यह कार्य अवश्य ही स्वागत योग्य है और इस कार्य में पूज्य स्वामी गोविंद गिरि जी महाराज और श्रृद्वेय सरसंघ संचालक की प्रेरणा निहित ह,ै मैं इस ट्रस्ट को हृदय से साधुवाद देता हॅूॅ।
सर संघ संचालक श्री मोहन भागवत ने अशोक सिंघल जी को याद करते हुये कहा कि श्री सिंघल भारत की वैदिक पहचान हैं। हम ने वेदों का अध्ययन कर उपनिषदों की रचना की है। परमाणुविक और वैज्ञानिक शोध करने वाले कई महान वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस कार्य को करने की प्रेरणा उन्हें गीता और वेदों से प्राप्त हुयी है। उन्होंने कहा कि वेद उपनिषिद अन्य धार्मिक ग्रंथों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी न होने के कारण जो विरोध देखने में आता था, वह धीरे-धीरे कम हो रहा है। वेदों का प्रचार-प्रसार करने वाले तथा वेदों में श्रद्वा रखने वालों को इस क्षेत्र में अभी और अधिक गति से कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वेद तो सनातन हैं। आधुनिक जगत की भाषा में वेद को लोग समझ सकें इसके लिये हमें वेदों को उनकी भाषा में प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा देश के सर्वहित सर्व कल्याण का रास्ता हजारों वर्ष पूर्व से ही वेदों में निहित है, यह लोगों को समझना पडेगा। हम सभी को चाहिये कि वेदों का अध्ययन करें, नदी के बहाव को नदी में उतर कर ही महसूस किया जा सकता है, किनारे पर खडे रहकर नहीं। उन्होंने आम जनमानस का आवाहन किया कि सेतु बंधन में गिलहरी की भाॅति ही सही वेदों के प्रचार-प्रसार एवं ज्ञानार्जन लिये कुछ न कुछ अवश्य ही योगदान करें।
परम पूज्य स्वामी श्री देवगिरि महाराज ने कहा कि इस शरद पूर्णिमा के पावन दिवस पर सायंकालीन बेला में इतने भव्य आयोजन में प्रतिभाग कर मेरा अन्तःकरण आनंन्द से प्रफुल्लित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व भर के वेद विद्यालय, वेदाचार्य, संस्थायें एवं छात्रगण सभी हमारे हैं। हमारा समर्पण सदैव ही वेदों के प्रति रहा है। हम सभी भारतीय संस्कृति के उपासक हैं। वेद की कल्पना विश्व मानुष की कल्पना है। वेद विश्वव्यापी हैं। उन्होंने कहा वेदों की सेवा और सुरक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी एवं कर्तव्य है। देवगिरि जी महाराज ने कहा कि वेदों की सुरक्षा करते हुये उनके सिद्वान्तों को लोगों तक पहुंचाना ही हमारा ध्येय होना चाहिये,इसके लिये उनकी शब्द रक्षा करना आवश्यक है।
समारोह में उत्कृष्ट वैदिक छात्र के लिये बीड नागपुर महाराष्ट्र के श्री सागर शर्मा, आदर्श वेदाध्यापक के लिये चेन्नई के श्री वी0 राजगोपाल धनपाठी तथा सर्वश्रेष्ठ वेद विद्यालय के लिये समर्थ वेदविद्यालय ढालेगाॅव जिला परभणी को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर सिंघल फाउण्डेशन के ट्रस्टी एवं विद्वजन मौजूद थे।