भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी भारत नेपाल संबंधों की नई इबारत लिख रहे हैं। नेपाल और भारत के बीच सदियों से धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक नाता रहा है। दोनों देशों के बीच रिश्तों का एक मजबूत ताना बाना है, प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी इस रिश्ते को और प्रगाढ करने में जुटे हैं। प्रधानमंत्री जी का नेपाल दौरा एक ऐतिहासिक क्षण है। इस दौरे को मां सीता की नगरी जनकपुर से प्रभु राम की नगरी अयोध्या को, बस सुविधा से जोड़ने के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। भारत और नेपाल के लोगों के लिए ये एक भावनात्मक पहल है जो ये बताती है कि दोनों देशों के बीच हमेशा से अटूट रिश्ता रहा है। तमाम वैदिक व ऐतिहासिक तथ्य भी इस बात का प्रमाण हैं कि जनकपुर व काठमांडू का अयोध्या और काशी से भावनात्मक जुड़ाव रहा है।

शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि नेपाल हमेशा से भारत के लिए महज एक देश नहीं बल्कि दोस्त की भूमिका में रहा है। दोनों देशों के बीच हजारों सालों का रिश्ता रहा है। माता सीता और प्रभु राम इसके सीधे उदाहरण हैं। दोनों ही देश दुख सुख के साथी रहे हैं। आज भी दोनों ही देशों के हजारों लाखों लोग बेरोकटोक एक दूसरे के देश में रहते आ रहे हैं और कारोबार भी करते आ रहे हैं। मकर संक्रांति के मौके पर गोरक्षपीठ पर चढने वाली खिचड़ी भी हर बार नेपाल के राजपरिवार से आती रही है। यही नहीं नेपाल के रणबांकुरे हमेशा से भारत की रक्षा के लिए चट्टान बन कर खड़े होते आए हैं और ये सिलसिला आज भी जारी है। संकट के हर दौर में भी भारत एक सच्चे मित्र की तरह हमेशा से नेपाल के साथ खड़ा हुआ है। चाहे वह भूकंप का समय रहा हो या फिर बाढ का वक्त। नेपाल और नेपाल के लोग हमेशा से हमारे भारतीय परिवारों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।

शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी इस रिश्ते को नई पहचान दे रहे हैं। इसी दिशा में प्रधानमंत्री जी ने जनकपुर से सीधी बस सेवा की शुरूआत की है जिसकी अगवानी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने अयोध्या में की। यूं तो इन दोनों शहरों के बीच हमेशा से एक गहरा रिश्ता रहा है और हजारों सालों से तीर्थयात्री जनकपुर से अयोध्या व अयोध्या से जनकपुर तक की यात्रा करते रहे हैं। अब बस सेवा शुरू होने से तीर्थयात्रियों के लिए एक बेहतरीन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही दोनों देशों के बीच पहले से स्थापित सांस्कृतिक संबंधों को भी नया आयाम मिलेगा।