भारतीय जनता पार्टी प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव के शिक्षा के राजनीतिकरण किये जाने के आरोप पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अखिलेश यादव जी ने अपने शासन काल में शिक्षा को राजनीति की प्रयोगशाला बना दिया था। समूची शिक्षा व्यवस्था को नकल माफियाओं के भरोसे छोड दिया था। अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में बांटे गए लैपटाॅप और स्कूल बैग पर भी अपने पिता व तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की तस्वीर छापी थी। छात्रवृत्ति वितरण में भी मजहब के आधार पर भेदभाव किया था। अखिलेश शासन में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक राजनीति का शिकार थी। अब अखिलेश यादव जी को सद्बुद्धि आ गई है, तभी वो ट्वीट करके कह रहे है कि शिक्षा का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। उनकी यह कहना ‘‘नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली‘‘ कहावत को चरितार्थ कर रहा है।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश शासन में पढे लिखे नौजवानों को बेरोजगारी का दंश झेलना पड़ा। जितनी भी भर्तियां हुई, उसमें योग्यता का अपमान हुआ। भाई-भतीजावाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद और रिश्वत के आधार पर की गई भांर्तियां हाई कोर्ट-सुप्रीमकोर्ट में झूलती रही। अखिलेश यादव को शिक्षा के राजनीतिकरण पर प्रवचन देने का नैतिक अधिकार नहीं है।